EKO Movie Review: रहस्यमयी जंगल, अधूरी सच्चाई और दिमाग घुमा देने वाली कहानी
EKO Movie Review in Hindi: जानिए इस स्लो-बर्न मिस्ट्री थ्रिलर की कहानी, एक्टिंग, बॉक्स ऑफिस और क्या ये फिल्म आपके लिए है या नहीं।
EKO Movie Review: हर सीन में छुपा है एक राज
अगर आपको ऐसी फिल्में पसंद हैं जो धीरे-धीरे खुलती हैं, हर सीन में कुछ छुपा होता है और आखिर तक दिमाग में सवाल छोड़ जाती हैं—तो EKO आपके लिए एक खास अनुभव साबित हो सकती है। पिछले कुछ सालों में मलयालम सिनेमा ने अपनी अलग पहचान बनाई है और कंटेंट-ड्रिवन फिल्मों के जरिए दर्शकों का भरोसा जीता है। EKO इसी परंपरा को आगे बढ़ाती हुई एक स्लो-बर्न मिस्ट्री थ्रिलर है।
कहानी: जंगल, रहस्य और अधूरी सच्चाई
फिल्म की कहानी केरल और कर्नाटक की सीमा पर बसे एक घने जंगलों वाले इलाके काट्टुकुन्नु में सेट है। यहां एक पहाड़ी पर अकेले रहती हैं म्लाथी चेदत्ती, जिनका किरदार Biyana Momin ने निभाया है। वह मूल रूप से मलेशिया की रहने वाली हैं और एकांत में जीवन बिता रही हैं।
उनकी देखभाल के लिए उनके बेटों ने एक केयरटेकर रखा है—पियोस, जिसका किरदार Sandeep Pradeep निभाते हैं। पियोस का स्वभाव शांत है, लेकिन उसकी मौजूदगी में कुछ रहस्य छिपे हुए महसूस होते हैं।
म्लाथी के पति कुरियाचन, जिनका रोल Saurabh Sachdeva ने निभाया है, कई साल पहले रहस्यमय तरीके से गायब हो गए थे। वह पेशे से डॉग ब्रीडर थे और उनके खिलाफ एक आपराधिक मामला भी दर्ज था।
जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, कई लोग—पुलिस, पुराने परिचित और कुछ अनजान चेहरे—कुरियाचन की तलाश में उस जंगल तक पहुंचते हैं। हर किसी के पास अपने सवाल हैं:
- क्या कुरियाचन जिंदा है?
- क्या वह जंगल में छिपा हुआ है?
- पियोस और प्रशिक्षित कुत्तों की इसमें क्या भूमिका है?
फिल्म की खासियत: माहौल ही असली हीरो
EKO एक ऐसी फिल्म है जो कहानी से ज्यादा अपने माहौल (Atmosphere) पर निर्भर करती है। फिल्म का नैरेटिव नॉन-लीनियर है, यानी कहानी सीधे तरीके से नहीं बल्कि टुकड़ों में सामने आती है।
जंगल की धुंध, सुनसान घर, सीमित किरदार और प्रशिक्षित कुत्तों की मौजूदगी—ये सब मिलकर एक अजीब सा तनाव और डर पैदा करते हैं। फिल्म बार-बार दर्शक को सोचने पर मजबूर करती है कि क्या सच है और क्या सिर्फ अफवाह।
एक्टिंग: कम शब्द, गहरी परफॉर्मेंस
Sandeep Pradeep (पियोस)
फिल्म का सबसे प्रभावशाली किरदार। बिना ज्यादा संवाद के भी उनकी बॉडी लैंग्वेज और आंखें बहुत कुछ कह जाती हैं। उनका कैरेक्टर रहस्य से भरा हुआ है।
Biyana Momin (म्लाथी चेदत्ती)
बेहद कम डायलॉग के बावजूद शानदार अभिनय। उनके चेहरे के भावों में डर, मजबूती और अकेलापन साफ झलकता है।
Saurabh Sachdeva (कुरियाचन)
उनका किरदार जानबूझकर अधूरा और रहस्यमयी रखा गया है। हालांकि कुछ जगहों पर उनका प्रभाव उतना मजबूत नहीं बन पाता जितनी कहानी उनसे उम्मीद करती है।
सपोर्टिंग कास्ट भी अपने किरदारों में फिट बैठती है और कहानी को विश्वसनीय बनाती है।

फिल्म का अनुभव: हर किसी के लिए नहीं
यह फिल्म उन लोगों के लिए बनी है जो हर सवाल का सीधा जवाब नहीं चाहते। अगर आपको थ्योरी बनाना, संकेतों को जोड़ना और अधूरी कहानी को खुद समझना पसंद है—तो यह फिल्म आपको जरूर पसंद आएगी।
लेकिन अगर आप तेज रफ्तार कहानी और क्लियर क्लाइमैक्स पसंद करते हैं, तो EKO आपको थोड़ा धीमा और उलझा हुआ लग सकता है।
बॉक्स ऑफिस और सफलता
EKO 21 नवंबर 2025 को रिलीज हुई थी।
करीब 5 करोड़ के बजट में बनी इस फिल्म ने लगभग 50 करोड़ का कारोबार किया, जो अपने आप में एक बड़ी सफलता है।
यह फिल्म 2025 की चर्चित मलयालम फिल्मों में शामिल रही और टॉप 10 हाइएस्ट ग्रॉसिंग फिल्मों की सूची में भी अपनी जगह बनाने में सफल रही। इसने मेकर्स को अच्छा खासा मुनाफा दिया।
अंतिम फैसला (Final Verdict)
EKO एक अलग तरह की फिल्म है—यह जवाब देने से ज्यादा सवाल छोड़ती है।
यह फिल्म आपको सोचने पर मजबूर करती है और यही इसकी सबसे बड़ी ताकत है।
देखें अगर:
- आपको स्लो-बर्न थ्रिलर पसंद हैं
- आप ओपन-एंडेड स्टोरी एंजॉय करते हैं
- आपको डार्क और रहस्यमयी माहौल पसंद है
न देखें अगर:
- आपको तेज रफ्तार फिल्में पसंद हैं
- आप क्लियर एंडिंग चाहते हैं
👉 कुल मिलाकर, EKO एक ऐसा सिनेमैटिक अनुभव है जो हर किसी के लिए नहीं, लेकिन सही दर्शकों के लिए बेहद खास है।
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Prime News 24 के लेखक एम. एस. सिद्दीकी मनोरंजन और बॉलीवुड से जुड़ी खबरों पर अच्छी पकड़ रखते हैं। वे पाठकों को आसान और साफ भाषा में ताज़ा जानकारी और निष्पक्ष विश्लेषण देते हैं।
