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Lucky The Superstar Movie Review: उम्मीद जगाती कहानी, मगर पूरी तरह चमक नहीं पाती

Lucky The Superstar Movie Review (Hindi): एक प्यारे पपी और ऑटिस्टिक बच्ची की कहानी पर आधारित यह फिल्म भावनाओं और कॉमेडी का मिश्रण है। जानें फिल्म की कहानी, एक्टिंग, पॉजिटिव-नेगेटिव पॉइंट्स और पूरी समीक्षा।

Lucky The Superstar Movie Review: दिल को छूने वाली कहानी, लेकिन पूरी तरह असर नहीं छोड़ पाती

सिनेमा में जानवरों पर बनी कहानियां हमेशा दर्शकों को भावनात्मक रूप से जोड़ने की कोशिश करती हैं। खासकर कुत्तों पर आधारित फिल्में अक्सर वफादारी, प्यार और इंसानों के साथ उनके रिश्ते को दिखाती हैं। Lucky The Superstar भी इसी तरह की एक फिल्म है, जो एक छोटे से पपी की कहानी के जरिए इंसानों की भावनाओं, लालच और उम्मीद को दिखाने की कोशिश करती है।

हालांकि फिल्म का आइडिया काफी दिलचस्प है, लेकिन इसकी कहानी और भावनात्मक प्रस्तुति उतनी मजबूत नहीं बन पाती जितनी हो सकती थी। यही वजह है कि फिल्म मनोरंजन तो करती है, लेकिन दर्शकों के दिल में गहरी छाप छोड़ने में थोड़ी पीछे रह जाती है।

फिल्म की कहानी

फिल्म की शुरुआत एक दिल तोड़ देने वाली घटना से होती है। एक आवारा कुतिया, जिसकी आवाज मशहूर कलाकार कोवाई सरला ने दी है, भयंकर बाढ़ में अपने लगभग सभी नवजात पिल्लों को खो देती है। इस त्रासदी के बाद वह एक आखिरी पपी को जन्म देती है और उसका नाम रखती है लकी।

लेकिन किस्मत का खेल कुछ ऐसा होता है कि वह छोटा पपी भी अपनी मां से बिछड़ जाता है। इसके बाद कहानी दो अलग-अलग रास्तों पर आगे बढ़ती है।

एक तरफ मां अपने खोए हुए बच्चे को ढूंढने के लिए संघर्ष करती है। दूसरी तरफ वह पपी एक युवक लक्ष्मणन (जीवी प्रकाश) को मिलता है। वह उस पपी को अपने घर ले जाता है ताकि अपनी ऑटिस्टिक भांजी अम्मू को खुश कर सके।

धीरे-धीरे यह पपी लोगों की जिंदगी में बदलाव लाने लगता है। जहां एक छोटी बच्ची के जीवन में उम्मीद की किरण जगती है, वहीं कुछ लालची और सत्ता के भूखे नेता इस पपी को अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करना चाहते हैं। यहां तक कि राज्य का मुख्यमंत्री भी इस पपी को अपने पास रखने की कोशिश करता है।

यहीं से फिल्म में भावनाओं, कॉमेडी और सियासी व्यंग्य का मिश्रण शुरू होता है।

इंसान और जानवर के रिश्ते की झलक

फिल्म का सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि इसमें तीन कुत्तों को इंसानों की आवाज दी गई है।

लकी की मां और उसके दो साथी कुत्तों की आवाजें थम्बी रामैया और राजेंद्रन जैसे कलाकारों ने दी हैं। इन किरदारों के बीच की बातचीत फिल्म में हल्का-फुल्का हास्य पैदा करती है।

खास तौर पर राजेंद्रन का किरदार, जो सरला के किरदार के पीछे एक सड़कछाप रोमियो की तरह घूमता है, कई मजेदार पल देता है।

हालांकि कभी-कभी यह हास्य थोड़ा अजीब भी लगता है। कुछ संवाद ऐसे हैं जो दर्शकों को सोचने पर मजबूर कर देते हैं कि क्या जानवरों को इंसानी व्यवहार के साथ दिखाना सही दिशा में गया है या नहीं।

भावनात्मक जुड़ाव की कमी

फिल्म का सबसे कमजोर हिस्सा इसका भावनात्मक पक्ष है।

कहानी में यह दिखाया गया है कि पपी लकी और अम्मू के बीच एक खास रिश्ता बनता है, लेकिन स्क्रीन पर इस रिश्ते को सही तरीके से विकसित होते हुए नहीं दिखाया गया।

एक बच्चा किसी पपी को देखकर खुश हो जाए, यह सामान्य बात है। लेकिन फिल्म यह नहीं बता पाती कि अम्मू के लिए लकी इतना खास क्यों है।

अगर फिल्म इस रिश्ते को थोड़ा और गहराई से दिखाती, तो शायद दर्शक उससे ज्यादा जुड़ पाते।

ऑटिज़्म की प्रस्तुति पर सवाल

फिल्म में अम्मू का किरदार ऑटिज़्म से जुड़ा हुआ दिखाया गया है। लेकिन इस विषय को जिस तरह से पेश किया गया है, वह पूरी तरह संवेदनशील नहीं लगता।

कई जगह ऑटिज़्म को मानसिक बीमारी की तरह दिखाया गया है, जबकि वास्तव में यह एक न्यूरो-डेवलपमेंटल कंडीशन है।

फिल्म में इसे “हकीकत और कल्पना के बीच भ्रम” के रूप में समझाने की कोशिश की गई है, जो दर्शकों को थोड़ा असहज कर सकती है।

अभिनय

जीवी प्रकाश फिल्म के मुख्य किरदार में नजर आते हैं और वे कहानी को संभालने की पूरी कोशिश करते हैं। उनका किरदार एक ऐसे व्यक्ति का है जो पपी और बच्ची को मिलाने के लिए हर संभव कोशिश करता है।

हालांकि बाकी सहायक कलाकारों को ज्यादा मौके नहीं मिलते।

अनस्वरा राजन, जो फिल्म में एक एनिमल रेस्क्यू वर्कर के रूप में दिखाई देती हैं, उनका किरदार काफी सीमित है।

इसी तरह कई राजनीतिक किरदार भी सिर्फ कार्टून जैसे प्रतीत होते हैं, जिनमें ज्यादा गहराई नहीं दिखाई देती।

कॉमेडी और व्यंग्य

फिल्म में राजनीति पर हल्का व्यंग्य भी देखने को मिलता है।

कहानी में कई नेता इस पपी को अपने लिए भाग्यशाली ताबीज मानने लगते हैं। इससे कई हास्यपूर्ण स्थितियां बनती हैं, लेकिन बार-बार वही चीज दोहराने से यह थोड़ा थकाऊ भी लगने लगता है।

तकनीकी पहलू

फिल्म का विजुअल ट्रीटमेंट और बैकग्राउंड म्यूजिक ठीक-ठाक है।

कुछ सीन भावनात्मक बनाने की कोशिश करते हैं, लेकिन कमजोर लेखन की वजह से उनका असर सीमित रह जाता है।

फिल्म की खूबियां

  • कुत्तों के बीच के संवाद और हास्य
  • हल्की-फुल्की मनोरंजक कहानी
  • जीवी प्रकाश का संतुलित अभिनय

फिल्म की कमियां

  • भावनात्मक गहराई की कमी
  • ऑटिज़्म की संवेदनशील प्रस्तुति का अभाव
  • सहायक किरदारों का कमजोर लेखन
  • बार-बार दोहराया गया राजनीतिक हास्य

निष्कर्ष

Lucky The Superstar एक ऐसी फिल्म है जिसमें एक प्यारे पपी की कहानी के जरिए इंसानी भावनाओं और लालच को दिखाने की कोशिश की गई है।

फिल्म का विचार दिलचस्प है और इसमें कुछ हल्के-फुल्के मनोरंजक पल भी हैं। लेकिन मजबूत लेखन और गहरे भावनात्मक जुड़ाव की कमी के कारण यह फिल्म उतनी प्रभावशाली नहीं बन पाती जितनी हो सकती थी।

अगर आप एक हल्की-फुल्की, टाइम-पास फिल्म देखना चाहते हैं जिसमें थोड़ी कॉमेडी और थोड़ी भावनाएं हों, तो यह फिल्म आपको ठीक-ठाक मनोरंजन दे सकती है।

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M.S. Siddiqui

Prime News 24 के लेखक एम. एस. सिद्दीकी मनोरंजन और बॉलीवुड से जुड़ी खबरों पर अच्छी पकड़ रखते हैं। वे पाठकों को आसान और साफ भाषा में ताज़ा जानकारी और निष्पक्ष विश्लेषण देते हैं।

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