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Stock Market Crash Today: सेंसेक्स में 4 महीने की सबसे बड़ी गिरावट, निवेशकों को एक दिन में 8 लाख करोड़ का नुकसान

Stock Market Crash Today: जनवरी को भारतीय शेयर बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली। सेंसेक्स 780 अंक गिरा, निफ्टी 25,900 के नीचे बंद हुआ। जानिए बाजार गिरने की बड़ी वजहें, टॉप गेनर्स-लूजर्स और आगे का आउटलुक।

Stock Market Crash Today: उम्मीदों पर भारी पड़ी अनिश्चितता

8 जनवरी को भारतीय इक्विटी बाजार कमजोरी के साथ बंद हुए। जियो-पॉलिटिकल टेंशन, अमेरिका के संभावित टैरिफ, विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और कंपनियों की असमान तिमाही कमाई ने निवेशकों की धारणा को बुरी तरह प्रभावित किया। दिनभर बाजार पर दबाव बना रहा और अंततः प्रमुख सूचकांक लाल निशान में बंद हुए।

30 शेयरों वाला सेंसेक्स 780 अंक यानी 0.92 फीसदी गिरकर 84,180.96 पर बंद हुआ। यह 26 अगस्त 2025 के बाद एक दिन में सबसे बड़ी गिरावट मानी जा रही है। वहीं निफ्टी 50 में भी तेज दबाव देखने को मिला और यह 264 अंक या 1.01 फीसदी की गिरावट के साथ 25,876.85 पर बंद हुआ। निफ्टी का 25,900 के नीचे बंद होना तकनीकी रूप से निवेशकों के लिए नकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

मिडकैप-स्मॉलकैप में ज्यादा दर्द

बड़े शेयरों के साथ-साथ मिडकैप और स्मॉलकैप सेगमेंट में भी जोरदार बिकवाली हुई। बीएसई मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में करीब 2 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। इससे साफ है कि जोखिम से बचने की प्रवृत्ति केवल ब्लूचिप्स तक सीमित नहीं रही, बल्कि व्यापक बाजार में भी फैली।

टॉप गेनर्स और लूजर्स

निफ्टी के टॉप लूजर्स:

हिंडाल्को इंडस्ट्रीज

ONGC

जियो फाइनेंशियल

विप्रो

टेक महिंद्रा

इन शेयरों में मेटल, आईटी और एनर्जी सेक्टर से जुड़ी चिंताओं के कारण सबसे ज्यादा दबाव देखा गया।

निफ्टी के टॉप गेनर्स:

ICICI बैंक

एटर्नल

SBI लाइफ इंश्योरेंस

भारत इलेक्ट्रॉनिक्स

अडानी पोर्ट्स

कुछ चुनिंदा फाइनेंशियल और डिफेंस शेयरों में सीमित खरीदारी ने गिरावट को आंशिक रूप से संभालने की कोशिश की।

सेक्टोरल इंडेक्स का हाल

लगभग सभी सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान में बंद हुए।

मेटल

ऑयल एंड गैस

पावर

PSU बैंक

कैपिटल गुड्स

इन सेक्टर्स में 2 से 3 फीसदी तक की गिरावट दर्ज की गई। खासकर मेटल और ऑयल एंड गैस शेयरों पर ग्लोबल संकेतों का सबसे ज्यादा असर दिखा।

एक दिन में 8 लाख करोड़ रुपये स्वाहा

बाजार की इस तेज गिरावट ने निवेशकों की संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचाया। बीएसई में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन पिछले सत्र के करीब 480 लाख करोड़ रुपये से घटकर 472 लाख करोड़ रुपये से नीचे आ गया। यानी एक ही कारोबारी सत्र में निवेशकों को करीब 8 लाख करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा।

❓ बाजार में गिरावट की बड़ी वजहें

कमजोर ग्लोबल संकेत

एशियाई बाजारों में कमजोरी देखने को मिली। जापान का निक्केई 225 और हांगकांग का हैंग सेंग गिरावट के साथ कारोबार कर रहे थे। अमेरिकी बाजार भी पिछले सत्र में दबाव में बंद हुए। भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक व्यापार से जुड़ी अनिश्चितताओं ने जोखिम लेने की इच्छा को कम किया।

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें

ब्रेंट क्रूड 0.4 फीसदी बढ़कर 60.20 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। भारत जैसे आयात-निर्भर देश के लिए कच्चे तेल का महंगा होना महंगाई और चालू खाते के घाटे की चिंता बढ़ाता है।

व्यापार समझौते को लेकर चिंता

अमेरिका की ओर से रूस के साथ व्यापार करने वाले देशों पर भारी टैरिफ लगाने के प्रस्ताव ने एक्सपोर्ट-ड्रिवेन सेक्टर्स में डर पैदा किया। कपड़ा और झींगा निर्यात से जुड़े शेयरों में इसका सीधा असर दिखा।

FII की लगातार बिकवाली

विदेशी संस्थागत निवेशकों ने एक ही दिन में 1,527.71 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। जनवरी में अब तक FII करीब 5,760 करोड़ रुपये की निकासी कर चुके हैं, जो बाजार पर लगातार दबाव बना रहा है।

 वीकली एक्सपायरी का असर

गुरुवार को डेरिवेटिव्स की वीकली एक्सपायरी होने के कारण ट्रेडर्स ने पोजीशन अनवाइंड की, जिससे वोलैटिलिटी और बढ़ गई।

आगे बाजार का रुख क्या होगा?

Stock Market Crash Today: विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक ग्लोबल संकेतों में सुधार, कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता और FII फ्लो में वापसी नहीं होती, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। हालांकि लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह गिरावट चुनिंदा मजबूत शेयरों में निवेश का अवसर भी बन सकती है।

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Mohammad Rafi

मोहम्मद रफ़ी Prime News 24 में क्रिकेट से जुड़ी खबरों के लेखक हैं। वे अंतरराष्ट्रीय और घरेलू क्रिकेट, IPL, टी20 और वनडे मैचों से जुड़ी ताज़ा खबरें, अपडेट्स और विश्लेषण पाठकों तक पहुंचाते हैं। उनका लेखन सरल, तथ्यपरक और भरोसेमंद है।

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