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Stock Market Trends: साल के अंत में बाजार ने बदली चाल, जानिए कौन से शेयर चमके और कौन फिसले

Stock Market Trends: भारतीय शेयर बाजार में पिछले कई दिनों से जारी गिरावट का सिलसिला बुधवार को आखिरकार थमता नजर आया। साल 2025 के अंतिम कारोबारी दिन के शुरुआती सत्र में शेयर बाजार ने सकारात्मक शुरुआत की, जिससे निवेशकों को बड़ी राहत मिली। लगातार बिकवाली के दबाव के बाद घरेलू संस्थागत निवेशकों की मजबूत खरीदारी ने बाजार को सहारा दिया और निवेशकों की धारणा में सुधार देखने को मिला।

बीते कुछ कारोबारी सत्रों से बाजार पर वैश्विक संकेतों की कमजोरी, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और चुनिंदा सेक्टर्स में मुनाफावसूली का दबाव बना हुआ था। ऐसे में साल के आखिरी दिन बाजार की यह रिकवरी निवेशकों के लिए भरोसा बढ़ाने वाली साबित हुई है।

Stock Market Trends: प्रमुख सूचकांकों का हाल

शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स ने पिछले पांच दिनों की गिरावट को पीछे छोड़ते हुए 254.38 अंकों की तेजी दर्ज की और 84,929.46 के स्तर पर पहुंच गया। वहीं, निफ्टी 50 भी चार सत्रों की लगातार कमजोरी के बाद 89.15 अंकों की बढ़त के साथ 26,028 के स्तर पर कारोबार करता नजर आया।

बाजार जानकारों का मानना है कि यह तेजी मुख्य रूप से घरेलू निवेशकों के भरोसे, साल के अंत में पोर्टफोलियो री-बैलेंसिंग और चुनिंदा बड़े शेयरों में वैल्यू बायिंग के कारण देखने को मिली है।

कौन से शेयर आगे, कौन रहे पीछे?

सेंसेक्स की 30 प्रमुख कंपनियों में से कई दिग्गज शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली। टाटा स्टील, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, टाइटन, एक्सिस बैंक, अदाणी पोर्ट्स और हिंदुस्तान यूनिलीवर जैसे शेयरों में शुरुआती सत्र में सबसे ज्यादा तेजी दर्ज की गई। इन शेयरों में आई मजबूती ने बाजार को हरे निशान में बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई।

वहीं दूसरी ओर, कुछ प्रमुख कंपनियों पर दबाव भी देखने को मिला। बजाज फिनसर्व, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, महिंद्रा एंड महिंद्रा और इंफोसिस जैसे दिग्गज शेयर गिरावट के साथ कारोबार करते नजर आए। खासतौर पर आईटी और ऑटो सेक्टर के कुछ शेयरों में मुनाफावसूली का असर साफ दिखा।

संस्थागत निवेशकों का रुख क्या कहता है?

एक्सचेंज के आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशकों का रुख अभी भी बिकवाली का बना हुआ है। मंगलवार को विदेशी निवेशकों ने करीब 3,844.02 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। लगातार हो रही इस बिकवाली ने हाल के दिनों में बाजार पर दबाव बनाए रखा था।

इसके उलट, घरेलू संस्थागत निवेशकों ने बाजार को मजबूत सहारा दिया। DIIs ने 6,159.81 करोड़ रुपये की बड़ी खरीदारी की, जिससे बाजार को टूटने से बचाने में मदद मिली। विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू फंड्स और बीमा कंपनियों की यह खरीदारी आने वाले समय में बाजार की स्थिरता के लिए अहम साबित हो सकती है।

वैश्विक बाजारों से मिले संकेत

वैश्विक संकेतों की बात करें तो एशियाई बाजारों में बुधवार को मिला-जुला रुख देखने को मिला। दक्षिण कोरिया का कोस्पी, शंघाई का SSE कंपोजिट और हांगकांग का हैंग सेंग इंडेक्स गिरावट के साथ कारोबार कर रहे थे। इससे पहले अमेरिकी शेयर बाजार भी कमजोर बंद हुए थे, जिसका असर एशियाई बाजारों पर दिखाई दिया।

हालांकि, भारतीय बाजार पर इन वैश्विक संकेतों का असर सीमित रहा और घरेलू निवेशकों की खरीदारी ने बाजार को संभाल लिया।

कच्चे तेल की कीमतों से राहत

वैश्विक तेल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड में भी मामूली नरमी देखने को मिली। ब्रेंट क्रूड 0.10 प्रतिशत की गिरावट के साथ 61.27 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। कच्चे तेल की स्थिर कीमतें भारत जैसी आयात-निर्भर अर्थव्यवस्था के लिए राहत का संकेत मानी जा रही हैं, खासकर महंगाई के मोर्चे पर।

पिछले कारोबारी सत्र में क्या हुआ था?

मंगलवार को बाजार में कमजोरी का माहौल रहा था। सेंसेक्स 20.46 अंक गिरकर 84,675.08 के स्तर पर बंद हुआ था, जबकि निफ्टी 3.25 अंक फिसलकर 25,938.85 पर बंद हुआ था। बुधवार की शुरुआती तेजी ने पिछले पांच सत्रों की थकान को काफी हद तक कम कर दिया है।

निवेशकों के लिए आगे क्या संकेत?

Stock Market Trends: साल 2025 के आखिरी कारोबारी दिन बाजार की यह मजबूती निवेशकों के लिए सकारात्मक संकेत दे रही है। अब सभी की नजरें बाजार की क्लोजिंग पर टिकी हैं, क्योंकि यही 2026 की शुरुआती दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है। यदि घरेलू निवेशकों की खरीदारी बनी रहती है और वैश्विक संकेतों में सुधार होता है, तो आने वाले दिनों में बाजार में और स्थिरता देखने को मिल सकती है।

Sensex-Nifty Update: एशियाई बाजारों की मजबूती से सेंसेक्स-निफ्टी चढ़े

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Mohammad Rafi

मोहम्मद रफ़ी Prime News 24 में क्रिकेट से जुड़ी खबरों के लेखक हैं। वे अंतरराष्ट्रीय और घरेलू क्रिकेट, IPL, टी20 और वनडे मैचों से जुड़ी ताज़ा खबरें, अपडेट्स और विश्लेषण पाठकों तक पहुंचाते हैं। उनका लेखन सरल, तथ्यपरक और भरोसेमंद है।

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