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Jatadhara Movie Review: सुधीर बाबू की Ghost Hunting और पिशाचिनी का आतंक—कैसी है फिल्म?

Jatadhara Movie Review Hindi में पढ़ें। जानें सोनाक्षी सिन्हा के खौफनाक रोल, सुधीर बाबू की घोस्ट हंटिंग और फिल्म की कहानी, क्लाइमेक्स व परफॉर्मेंस का पूरा विश्लेषण।

Jatadhara Movie Review (Hindi)

हॉरर फिल्मों में नया प्रयोग करना आसान नहीं होता, खासकर तब जब दर्शक पहले से ही घिसे-पिटे डरावने फॉर्मूलों से ऊब चुके हों। ‘Jatadhara’ इसी चुनौती को स्वीकार करती है और एक अलग तरह की कहानी पेश करने की कोशिश करती है, जहां तर्क और आस्था का टकराव दिखाया गया है।

इस फिल्म में Sudheer Babu एक ऐसे घोस्ट-हंटर के किरदार में नजर आते हैं जो खुद को तार्किक मानता है, जबकि Sonakshi Sinha एक खौफनाक पिशाचिनी के रूप में फिल्म का सबसे बड़ा आकर्षण बनती हैं।

कहानी: तर्क और अंधविश्वास के बीच संघर्ष

कहानी शिवा (सुधीर बाबू) के इर्द-गिर्द घूमती है, जो आधुनिक गैजेट्स के जरिए ‘नेगेटिव एनर्जी’ की तलाश करता है। वह एक तरह से वैज्ञानिक सोच वाला घोस्ट-हंटर है, जो हर चीज़ को लॉजिक से समझना चाहता है।

उसकी मुलाकात इंडियन पैरानॉर्मल सोसाइटी के हेड मनीष से होती है, जो उसके विचारों को चुनौती देता है। वहीं, उसकी जिंदगी में सीतारा (दिव्या खोसला) की एंट्री होती है, जिसे वह पहले एक आत्मा समझता है लेकिन बाद में सच्चाई कुछ और निकलती है।

कहानी में ट्विस्ट तब आता है जब शिवा को बार-बार एक डरावना सपना आता है—एक महिला एक नवजात बच्चे को मारने की कोशिश कर रही होती है। इसी के साथ फिल्म में धन पिशाचिनी (सोनाक्षी सिन्हा) का एंगल जुड़ता है, जो कहानी को और गहरा और रहस्यमयी बनाता है।

धीरे-धीरे यह साफ होता है कि यह सिर्फ भूत-प्रेत की कहानी नहीं है, बल्कि लालच, शक्ति और मानव स्वभाव के अंधेरे पक्ष को भी दर्शाती है।

परफॉर्मेंस: सोनाक्षी का खौफ, सुधीर की गंभीरता

फिल्म की सबसे बड़ी ताकत है इसका स्टार कास्ट।

सुधीर बाबू ने अपने किरदार में गंभीरता और संतुलन बनाए रखा है। उनका घोस्ट-हंटर अवतार विश्वसनीय लगता है।

सोनाक्षी सिन्हा का ‘ईविल’ रोल फिल्म का हाईलाइट है। उनका स्क्रीन प्रेजेंस और डर पैदा करने की क्षमता काफी प्रभावशाली है।

दिव्या खोसला ने एक सॉफ्ट और इमोशनल टच दिया है, हालांकि उनका किरदार थोड़ा सीमित लगता है।

सपोर्टिंग कास्ट भी कहानी को मजबूती देती है, खासकर धार्मिक और पारंपरिक पहलुओं को दर्शाने में।

डायरेक्शन: नया कॉन्सेप्ट, लेकिन क्लाइमेक्स में कमजोरी

डायरेक्टर्स अभिषेक जायसवाल और वेंकट कल्याण ने फिल्म को एक अलग दृष्टिकोण से पेश करने की कोशिश की है।

फिल्म का शुरुआती और मध्य भाग काफी दिलचस्प है, जहां तर्क और आस्था के बीच टकराव दिखाया गया है। लेकिन क्लाइमेक्स आते-आते फिल्म थोड़ा प्रेडिक्टेबल हो जाती है और वही पुराने हॉरर ट्रॉप्स देखने को मिलते हैं।

हालांकि, कहानी में सीक्वल की गुंजाइश साफ नजर आती है।

Jatadhara Movie Review
Image Credit: Social Media

हॉरर एलिमेंट्स: डर कम, कॉन्सेप्ट ज्यादा

अगर आप जंप स्केयर या पारंपरिक डरावनी फिल्म की उम्मीद लेकर जाते हैं, तो शायद थोड़ा निराश हो सकते हैं।

फिल्म में हॉरर से ज्यादा फोकस इसके कॉन्सेप्ट और मैसेज पर है—

असली ‘बुराई’ इंसानों के अंदर मौजूद लालच है।

कुछ सीन्स में विजुअल्स और बैकग्राउंड स्कोर अच्छा काम करते हैं, लेकिन कुल मिलाकर डर का स्तर औसत ही रहता है।

क्या खास है फिल्म में?

  •  तर्क vs आस्था का अनोखा कॉन्सेप्ट
  •  सोनाक्षी सिन्हा का डार्क अवतार
  •  कहानी में सामाजिक संदेश
  •  पैरानॉर्मल साइंस और धार्मिक तत्वों का मिश्रण

 कहां रह गई कमी?

  •  क्लाइमेक्स काफी प्रेडिक्टेबल
  •  पिशाचिनी का किरदार थोड़ा एक-आयामी
  •  हॉरर एलिमेंट्स में कमी
  •  कुछ जगहों पर कहानी खिंची हुई लगती है

⭐ Jatadhara Movie Review Rating:

⭐ 3 / 5

फाइनल वर्डिक्ट:

Jatadhara’ एक अलग तरह की हॉरर फिल्म है, जो सिर्फ डराने की बजाय सोचने पर मजबूर करती है। यह फिल्म उन दर्शकों के लिए ज्यादा बेहतर है, जो कंटेंट और कॉन्सेप्ट में नया देखना चाहते हैं।

अगर आप सोनाक्षी सिन्हा का नया अवतार और एक अलग तरह की हॉरर कहानी देखना चाहते हैं, तो यह फिल्म एक बार जरूर देख सकते हैं।

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M.S. Siddiqui

Prime News 24 के लेखक एम. एस. सिद्दीकी मनोरंजन और बॉलीवुड से जुड़ी खबरों पर अच्छी पकड़ रखते हैं। वे पाठकों को आसान और साफ भाषा में ताज़ा जानकारी और निष्पक्ष विश्लेषण देते हैं।

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