Mayasabha Review Hindi: बिना शोर-शराबे रिलीज हुई ‘मायासभा’, सोशल मीडिया पर बंटी राय
अनिल बर्वे निर्देशित ‘Mayasabha’ रिलीज के बाद चर्चा में है। जावेद जाफरी की एक्टिंग, कहानी और दर्शकों के रिव्यू जानिए यहाँ।
‘Mayasabha’ रिव्यू: दर्शकों की प्रतिक्रियाओं से जानिए फिल्म का असली असर
Mayasabha ने रिलीज से पहले किसी भी तरह का प्रमोशन नहीं किया। न कोई बड़ा ट्रेलर लॉन्च इवेंट, न इंटरव्यू और न ही सोशल मीडिया कैंपेन। इसके बावजूद जैसे ही फिल्म का ट्रेलर सामने आया, दर्शकों के बीच इसे लेकर उत्सुकता बढ़ गई। इसकी सबसे बड़ी वजह थी फिल्म के निर्देशक अनिल बर्वे, जिन्होंने पहले Tumbbad जैसी कल्ट फिल्म बनाई थी।
अब जब ‘Mayasabha’ सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है, तो दर्शक फिल्म देखने के बाद खुलकर अपनी राय रख रहे हैं। सोशल मीडिया और रिव्यू प्लेटफॉर्म्स पर फिल्म को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
दर्शकों को क्यों पसंद आ रही है ‘मायासभा’?
फिल्म को पसंद करने वाले दर्शकों का मानना है कि ‘मायासभा’ एक धीमी लेकिन गहराई से असर छोड़ने वाली मनोवैज्ञानिक थ्रिलर है। एक यूजर ने फिल्म को 5 में से 4 स्टार देते हुए लिखा कि यह फिल्म भव्यता या बड़े सेट्स पर नहीं, बल्कि किरदारों और उनकी मानसिक उलझनों पर केंद्रित है।
उनके अनुसार, ‘मायासभा’ लालच, भ्रम और आत्मसंघर्ष की कहानी है, जो हर दर्शक के लिए नहीं है, लेकिन जिन्हें character-driven cinema पसंद है, उनके लिए यह फिल्म खास अनुभव साबित हो सकती है।

जावेद जाफरी की एक्टिंग बनी फिल्म की सबसे बड़ी ताकत
फिल्म में सबसे ज्यादा तारीफ हो रही है जावेद जाफरी की। उन्होंने ‘परमेश्वर खन्ना’ के किरदार को बेहद संजीदगी और गहराई के साथ निभाया है। कई दर्शकों का कहना है कि जावेद जाफरी ने पूरी फिल्म को अपने अभिनय के दम पर संभाल रखा है।
एक यूजर ने लिखा,
“जावेद जाफरी ने साबित कर दिया कि वह सिर्फ कॉमेडी तक सीमित नहीं हैं। उनकी परफॉर्मेंस फिल्म की रीढ़ है।”
वहीं, एक अन्य दर्शक ने फिल्म को Must Watch बताते हुए इसे 5/5 स्टार दिए और कहा कि स्क्रिप्ट और निर्देशन दोनों ही बेहद सधे हुए हैं।
हर किसी को क्यों नहीं भा रही ‘मायासभा’?
जहाँ एक वर्ग फिल्म की तारीफ कर रहा है, वहीं कुछ दर्शक ऐसे भी हैं जिन्हें फिल्म उम्मीद के मुताबिक नहीं लगी। कुछ का मानना है कि फिल्म की शुरुआत काफी स्लो है।
एक यूजर ने लिखा कि शुरुआती 40–45 मिनट उन्हें काफी उबाऊ लगे और फिल्म का क्लाइमेक्स में किया गया एक बड़ा खुलासा जबरदस्ती जोड़ा हुआ महसूस हुआ।
एक अन्य दर्शक ने सोशल मीडिया पर लिखा कि उन्होंने फिल्म के पहले हिस्से में ही ऊब महसूस की और यह निर्देशक की पिछली फिल्म के मुकाबले कमजोर लगी।
निर्देशन और कहानी पर क्या बोले दर्शक?
अनिल बर्वे का निर्देशन कई दर्शकों को पसंद आया, खासकर उनका atmosphere build-up और साइलेंट मोमेंट्स का इस्तेमाल। हालांकि, कुछ लोगों को लगा कि फिल्म का ट्रीटमेंट बहुत आर्ट-हाउस हो गया है, जो आम दर्शकों को कनेक्ट नहीं कर पाता।
कहानी को लेकर भी राय बंटी हुई है। कुछ दर्शकों को इसकी अनोखी सोच और मनोवैज्ञानिक परतें पसंद आईं, जबकि कुछ को यह जरूरत से ज्यादा जटिल लगी।
फिल्म की स्टारकास्ट
‘Mayasabha’ में जावेद जाफरी के अलावा वीना जामकर, दीपक दामले और मोहम्मद समद भी अहम भूमिकाओं में नजर आते हैं। सभी कलाकारों ने अपने-अपने किरदारों को ईमानदारी से निभाया है, लेकिन फोकस ज्यादातर जावेद जाफरी पर ही टिका रहता है।
निष्कर्ष: देखनी चाहिए या नहीं?
अगर आपको धीमी, सोचने पर मजबूर करने वाली psychological thrillers पसंद हैं और आप मसालेदार एंटरटेनमेंट से हटकर कुछ अलग देखना चाहते हैं, तो ‘मायासभा’ आपको निराश नहीं करेगी।
लेकिन अगर आप तेज रफ्तार कहानी और लगातार ट्विस्ट्स की उम्मीद कर रहे हैं, तो यह फिल्म आपके लिए नहीं भी हो सकती।
कुल मिलाकर, ‘Mayasabha’ एक bold cinematic experiment है, जो दर्शकों को बांटती जरूर है, लेकिन चर्चा में पूरी तरह बनी हुई है।
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Prime News 24 के लेखक एम. एस. सिद्दीकी मनोरंजन और बॉलीवुड से जुड़ी खबरों पर अच्छी पकड़ रखते हैं। वे पाठकों को आसान और साफ भाषा में ताज़ा जानकारी और निष्पक्ष विश्लेषण देते हैं।
